Best CouplesTips By Dr. MSG

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कूछ कामकाजी दम्पति सिर्फ अपने करियर को अपनी प्राथमिकता बना लेते हैं, अपने बच्चों पर बिलकुल ध्यान नहीं दे पाते, बच्चे के साथ समय बिताना न भूलें, पति पत्नी को चाहिए की बच्चे को अच्छी सीख दें, बच्चा बड़ा होकर नेक बने यह उसके लिए उतना ही ज़रूरी है जितना आपके लिए, अच्छे संस्कारों वाला नौजवान आगे चलकर माँ-बाप और देश दोनों का गौरव बढ़ाता है

विश्वास पति पत्नी के बीच अच्छे रिश्तों का आधार है, बिना विश्वास के हर रिश्ता कमजोर है। दोनों को चाहिए की चाहे कितनी भी विपरीत परिस्थितियां आ जाएं लेकिन परस्पर विश्वास की डोर जुडी रहे, एक दुसरे पर बेवजह शक करने से भी बचना चाहिए

अगर कोई महिला विवाह के बाद पढ़ना चाहती है या करियर आगे बढ़ाना चाहती है तो पति को उसका उत्साह बढ़ाना चाहिए और कभी भी उसे रोकना नहीं चाहिए, कई बार कूछ पुरुष समाज के लोगों की बातों में आकर गलत निर्णय ले लेते हैं, एक सशक्त महिला न सिर्फ परिवार को बल्कि देश को आगे बढ़ने में उतनी ही समर्थ है जितना की पुरुष

कई बार पति पत्नी तनाव के कारण गुस्से में एक दुसरे को कूछ बोल जाते हैं, सुखी गृहस्थ जीवन के लिए कूछ बातों को हलके में लेना ज़रूरी है , कई बार हंसकर टाल दीजिये, समय के साथ एक दुसरे की प्रतिक्रिया करने के तरीके को जानिये इससे कभी कलह नहीं होगी

विवाह के बाद नैतिक दृढ़ता और संयम अति ज़रूरी है, अपने पार्टनर के प्रति सम्मान का भाव रखिये और जीवन के मुख्य निर्णयों में उन्हें हिस्सेदार बनाइये, आपसी राय और परामर्श लेने देने से रिश्ता मजबूत होगा और घर स्वर्ग हो जायेगा

विवाह से पहले कुंडली-मिलाप जैसे अंधविश्वास में न पड़कर मेडिकल चेकअप जैसे रक्त विकार परिक्षण, जेनेटिक, STD और प्रजनन परिक्षण इत्यादि करवा लेने चाहिए, इससे विवाह के बाद आप और आने वाली संतान दोनों भयंकर बिमारियों से बच सकते हैं

अपने बच्चों को कम उम्र से ही मैडिटेशन की आदत डालिए, बच्चों को मैडिटेशन करने के लिए इनाम का लालच दीजिये जिससे वो प्रोत्साहित हों, उनमें आत्मबल और आत्मिक शांति आएगी

अपने बच्चों को हमेशा डराकर धमकाकर मत रखिये, ऐसा करने से वो आपसे कुछ भी शेयर नहीं करेंगे और गलत राह पर जा सकते हैं, बच्चों के दोस्त बनकर रहिये

पति-पत्नी के बीच तनाव का एक मुख्या कारण है दोनों का एक-दूसरे को समय नहीं दे पाना, काम के साथ-साथ आपका गृहस्थ जीवन को समय देना अति ज़रूरी है, घर-परिवार, ऑफिस और जीवन की अन्य बातों का ज्यादा से ज्यादा discuss करके निर्णय लें

विवाह के बाद पति-पत्नी का सिर्फ एक दुसरे से नहीं बल्कि एक दुसरे के परिवारों से रिश्ता बनता है, एक दुसरे के माता-पिता और परिवार का सम्मान करना और सुख दुःख में उनका साथ देना आप दोनों का फ़र्ज़ है

विवाह बिना दहेज़ और जहां तक हो सके बिना किसी देख दिखावे के होना चाहिए, समाज की कुरीतियों को न अपनाना आपका फ़र्ज़ है, सही राह पर चलते हुए लोगों की ज्यादा परवाह नहीं करनी चाहिए

विवाह के बाद छोटे-मोटे compromises को बोझ नहीं समझना चाहिए, adjustment किसी भी सुखद वैवाहिक जीवन का आधार है, ऐसा करने से समय के साथ आपका रिश्ता मजबूत होगा

काम का stress कभी भी घर लेकर नहीं आना चाहिए, यह बहुत बड़ा कलह का कारण है और बच्चों पर भी बुरा असर डालता है, अगर तनाव हो भी तो भी घर जब वापस आओ तो चेहरे पर हमेशा मुस्कराहट रखो

लड़का और लड़की को पति-पत्नी द्वारा एक ही नज़र से देखना चाहिए, कभी भूलकर भी होने वाले बच्चे का लिंग जांच नहीं करवाना चाहिए और आस पास जो लोग ऐसा करते हैं उन्हें भी समझाना चाहिए

अपने सपनों और महत्वाकांक्षाओं को बच्चों पर थोपना नहीं चाहिए, बच्चे को वो बनने के लिए प्रेरित करो जिस चीज़ में उसका interest हो , उसपर कोई ख़ास पेशा अपनाने के लिए बोझ नहीं डालना चाहिए