Best HumanityTips By Dr. MSG

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मानवता की भलाई में खर्च किया हुआ धन एक बीज के समान है जिसे परमात्मा अंकुरित करके आपकी ज़िन्दगी में हरियाली ले आते हैं, मानवता की भलाई करने में जो ख़ुशी है जो नशा है वो सिर्फ वहीँ समझ सकता है जो इस राह पर चलता है

असली इंसानियत है अपना काम धंधा करते हुए ईमानदारी के साथ करते हुए मानवता की भलाई के लिए कार्य करना, जो भी ऐसा करता है उसे बेहिसाब खुशियां मिलती हैं

धन का मूल्य तभी है तब वह किसी गरीब और बेसहारा के काम आये, असली अमीरी सिक्कों की नहीं दिल की होती है, दूसरोंकी भलाई में धन लगाने से मोह और लालच कम होता है और परोपकार एवं परमार्थ की खुशियां अलग मिलती हैं

सिर्फ दूसरों को ईमानदारी की राह पर चलने के लिए प्रेरित करना और परमात्मा से जोड़ना इंसानियत नहीं, सबसे पहले ज़रूरी है खुद के सारे अवगुण निकालना

ऐसा कभी नहीं सोचना चाहिए की सिर्फ बूढ़े होने पर ही परमात्मा से जुड़ना चाहिए, क्या पता कब सांसों की डोर टूट जाए ? कम उम्र में की गयी भक्ति मालिक पहले दर्जे की मंज़ूर करता है

ज्यादा से जयादा समय मानवता की सेवा में लगाना चाहिए, लेकिन कभी भी सेवा का अहंकार नहीं होना चाहिए, सेवा परमात्मा की तरफ से एक गिफ्ट है जो सिर्फ नसीब वालों को मिलता है

एक नूर से सब जग उपजेया,हम सब एक हैं, सब धर्म एक ही संदेश देते हैं, धर्मों की एकता बनाए रखने के लिए कार्य करना एक बहुत बड़ी मानवता की सेवा है

असली मानवता है दुसरे के दर्द को अपना दर्द समझना, सबके प्रति प्रेम और दया का भाव रखना ही सच्ची इंसानियत है,कहा भी गया है की दयालुता वो भाषा है जिसे बहरे सुन सकते हैं और अंधे देख सकते हैं

रक्त दान, जीते जी या मरनेकेबाद अंगदान जैसे परोपकार महादान की श्रेणी में आते हैं और आपको जल्दी ही मालिक की दया मेहर रहमोकरम के क़ाबिल बना देते हैं

भीषण गर्मी में सबको दुसरे इंसानों का ही नहीं बल्कि पशुओं का भी ख्याल रखना चाहिए, पक्षियों के लिए भी छत पर पानी जरूर रखना चाहिएऔर सड़क और गलियों में घूमने वाले भूखे जानवरों को खाना भी डालना चाहिए

जैसे-जैसे कलियुग का प्रकोप तेज़ हो रहा है वैसे ही दयाल भी छूट देता है, सिर्फ 1-2 घंटे सुमिरन करके आप पुराने युगों की कई सौ सालों की भक्ति के बराबर फल कमा सकते हो

जीवन की खूबसुरती इस बात से नहीं आंकी जाती कि आप कितने खुश हैं बल्कि इससे की आपके आस-पास के लोगों को आप कितना खुश रखते हो

खुदा की रहमत पाने के लिए अहंकार को त्याग दो, जैसे-जैसे अहंकार त्यागते जाओगे वैसे वैसे मालिक की कृपा मूसलाधार बरसती जाएगी

शराब और दुसरे नशों के सेवन से आपकी सारी इंसानियत उसमें घुलकर शरीर से निकल जाएगी, रूहानी तरक्की के लिए नशे छोड़ने होंगे

अगर आप मानवता का भलाई करने वालों का संग करोगे तो आपसे अंदर भी दुसरे के लिए दया भाव पैदा होगा, बुरे लोगों का संग कभी न करो

जबभगवान आपकी कोई इच्छा पूरी करता है तो उसका शुक्राना करो न की नयी-नयी मांगे रखो, मालिक से सिर्फ मालिक को मांगो

विवाह योग्य युवक और युवतियों को शारीरिक रूप से अपंग लोगों से विवाह के लिए आगे आना चाहिए और इंसानियत की नयी मिसाल बनानी चाहिए

जो दूसरों की भलाई के लिए हमेशा तैयार रहता है मालिक हमेशा पल-पल उनका साथ देता है और उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता

जो सब कुछ पास होते हुए भी सेवा में आता है वो बहुत ऊँचे भागों वाला होता है ,ऐसे व्यक्ति से आत्मिक सुख जयादा दूर नहीं रह सकता

बार बार सत्संग सुनने से दूसरों की भलाई करने का विचार पक्का बना रहता है और मन पर भी लगाम लगी रहती है

सत्संग में कहा हुआ अगर आप एक शब्द भी जीवन में उतार लेते हो तो वो आपके पूरा जीवन बदल देने की ताकत रखता है , सत्संग में नियमित आना चाहिए

परमार्थ के कारने संत धरो शरीर, संत रात दिन मेहनत करते हैं जिससे समाज की बुराइयां दूर हों, उनका जन्म लेने का सिर्फ एक ही कारण है

सत्संग सुनकर अमल करने और मानवता भलाई के लिए कार्य करने से अभाग्यशाली व्यक्ति के भागों के द्वार खुल जाते हैं और वो सब कुछ पा जाता है

नियमित सुमिरन करने, निस्वार्थ भावना से सेवा करने और दीनता नम्रता धारण करने से आप अपार खुशियों के हकदार बनते हो

अगर आप मानवता की भलाई के लिए एक कदम उठाते हो तो भगवान आपकी भलाई के लिए कई सौ गुना कदम बढ़ाता है

अपने बच्चों में कम उम्र से ही मानवता की भलाई करने का जज़्बा पैदा करो, बच्चों को नेक बनने का यह आसान तरीका है

अगर आप मानवता की भलाई के करने के साथ रोजाना सुमिरन भी करते हो तो वो सोने पे सुहागा जैसा है

दूसरों में सिर्फ अच्छाई देखो, उनके गुण आपमें आ जायेंगे, निंदा चुगली करने से उनके अवगुण आपमें आ जायेंगे और आपको उनके करम उठाने पड़ेंगे

बुरे काम करके कमाया हुआ पैसा सिर्फ क्षणिक सुख देगा लेकिन पूरी ज़िन्दगी आपके दुखों का कारण बनेगा, ऐसी कमाई आपकी आत्मिक शांति और सुख दोनों छीन लेगी