Best Agriculture Tips By Dr. MSG

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जहां तक संभव हो organic farming को अपनाएँ , जैविक खेती वातावरण के लिए किसी भी तरह का खतरा पैदा नहीं करती और जलवायु परिवर्तन को रोकने का भी समाधान है

Organic farming कीटनाशकों और उर्वरकों की बजाय जैविक खाद पर निर्भर करता है जिससे आपकी सेहत ख़राब नहीं होती,कीटनाशकों के प्रयोग से चारा, सब्जियां, दूध और दूध उत्पाद सभी दूषित हो जाते हैं

Organic farming कीटनाशकों और उर्वरकों की बजाय जैविक खाद पर निर्भर करता है जिससे आपकी सेहत ख़राब नहीं होती,कीटनाशकों के प्रयोग से चारा, सब्जियां, दूध और दूध उत्पाद सभी दूषित हो जाते हैं

कृषि शुरू करने से पहले पौधों के लिए सूर्य प्रकाश, उपजाऊ मिटटी, पानी की उपलब्धता हमेशासुनिश्चित कर लेनी चाहिए, खेती के लिए प्राकृतिक और वैज्ञानिक दोनों तरीकों को अपनाना चाहिए

कौनसी फसल उगानी है इसका चयन क्षेत्र की मिटटी, जलवायु और उत्पाद की माँग के हिसाब से करनी चाहिए, फसल सेलेक्ट करने के बाद उसके उत्तम बीजों का चयन ज़रूरी है तभी सफलता मिलेगी

आजकल बहुत सारे मोबाइल Apps आ गए हैं जो आपको आसानी से नजदीकी मंडियों में फसलों के मोल भाव बता सकते हैं, इनके इस्तेमाल से आप सही निर्णय लेकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं और नाजायज़ कमीशन लेने वालों से भी बचे रहेंगे

खेती में हर तरह के कीड़े नुकसानदायक नहीं होते, कूछ सूक्ष्म जीव व कीट मिटटी को ढीला और वायु युक्त बनाए रखने में मदद करते हैं, इनका इस्तेमाल कृषि को प्राकृतिक रूप देता है और गुणवत्ता बढ़ता है

नियमित रूप से मिटटी की जांच ज़रूरी है, इससे मिटटी में जरुरी खनिजों जैसे नाइट्रोजन फॉस्फोरस पोटैशियम आदि की कमी का पता चलता है इससे आप उपयुक्त खाद चुन सकेंगे, Soilhealth card का प्रयोग करना चाहिए

भंडारण के दौरान बीज व अनाज को क्षति पहुंचाने में कीट अपना अहम् किरदार निभाते हैं। बीज को किसी भी स्थान या बर्तन में रखने से पहले बीज को अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए जिससे उसमें नमी की मात्रा 10 प्रतिशत या उससे कम रह जाए। कम नमी वाले बीजों में अधिकांश कीट नुकसान नहीं कर पाते हैं।

वर्षाजल संरक्षण जल संकट से निजात पाने का का महत्वपूर्ण तरीका है। सूखे की वजह से हर सालकिसानों को भारी नुक्सान होता है, कई बार वर्षाजल संरक्षण की मदद से इतना पानी जमा हो जाता है कि दूसरे स्रोत की जरूरत नहीं पडती और यह पानी एकदम साफ़ भी होता है

छँटनी का इस्तेमाल पौधों से जयादा उत्पादन लेने के लिए और उन्हें जयादा आकर्षक बनने के लिए किया जा सकता है लेकिन छँटनी हमेशा फल निकालने के बाद करनी चाहिए वरना उत्पादन कम हो सकता है

सूखी, टूटी हुई, रोगग्रस्त और ज़मीन की और बढ़ने वाली डालियों को काट देना चाहिए,छँटनी के समय डालियाँ काटने के बाद कटे हुए स्थान पर गोबर और राख का लेप लगने से डालियों में नमी बनी रहती है और पोधे में रोग भी कम लगते हैं